कभी मुझ पर हुआ करती थी हरियाली ,

मनुष्यों के कारण छा गयी है विपदा काली|
अपनी सुन्दरता से मुझे क्या है करना ?
मनुष्यों के लिए हीं मैंने पहना था हरियाली का
गहना |
यह जानते हुए भी मनुष्य कर रहे पेड़ो की
कटाई,
अपनी बर्बादी को मनुष्यों ने खुद है बुलाई |
कहीं यह सपना बन ना जाए सच्चाई ,
इसीलिए प्लीज़ रोको पेड़ो की यह कटाई

मनुष्यों के कारण छा गयी है विपदा काली|
अपनी सुन्दरता से मुझे क्या है करना ?
मनुष्यों के लिए हीं मैंने पहना था हरियाली का
गहना |
यह जानते हुए भी मनुष्य कर रहे पेड़ो की
कटाई,
अपनी बर्बादी को मनुष्यों ने खुद है बुलाई |
कहीं यह सपना बन ना जाए सच्चाई ,
इसीलिए प्लीज़ रोको पेड़ो की यह कटाई
8:22 AM
koshish group


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